कैमूर में ऐतिहासिक शिलालेख क्षतिग्रस्त, असामाजिक तत्वों ने छेनी-हथौड़ी से किया नष्ट | Kaimur News
बिहार के कैमूर जिले में स्थित मलुआ पहाड़ी की तलहटी में एक प्राचीन शिलालेख को असामाजिक तत्वों द्वारा बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। यह शिलालेख हजारों वर्ष पुरानी सिद्धमातृका लिपि में अंकित था, जिसे छेनी-हथौड़ी की मदद से मिटाने का प्रयास किया गया है। स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रशासन की उदासीनता को इसका मुख्य कारण बताया है।
स्थानीय बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि भगवानपुर प्रखंड में कई प्राचीन धरोहरें मौजूद हैं, जिनमें कसेर की देवरा पहाड़ी, जैदपुर कला की पहाड़ी और अन्य क्षेत्रों में हजारों वर्ष पुरानी मूर्तियां और शिलालेख शामिल हैं। लेकिन जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और पुरातत्व विभाग द्वारा इनके संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। परिणामस्वरूप, ये अमूल्य धरोहरें धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, मलुआ पहाड़ी का यह शिलालेख पूर्व मध्यकाल का है। इतिहासकार डॉ. डी.डी. सरकार ने वर्ष 1960-61 में इसका अध्ययन किया था और अपनी पुस्तक ‘एपिग्राफिका इंडिया’ में इसका उल्लेख किया था। उनके शोध के अनुसार, यह शिलालेख विक्रम संवत 1162 (1105-1106 ई.) का है, जिसमें वाराणसी राज्य सीमा के अंतर्गत कसरमोला पतला के अमरगढ़ गांव में नायक अंग सिंहांग सिंहा द्वारा स्थानीय शिव मंदिर को भूमि दान दिए जाने का उल्लेख था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिलालेख की घेराबंदी और सुरक्षा की व्यवस्था की गई होती तो इस अमूल्य धरोहर को बचाया जा सकता था। वन विभाग के अधिकारी भी इसकी सुरक्षा में असफल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और शेष धरोहरों के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
