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बच्चों पर फास्ट फूड का लाड़: स्वाद के चक्कर में जिंदगी से खिलवाड़, जानिए एक्सपर्ट की राय

By Dec 25, 2025

फास्ट फूड और जंक फूड व्यस्त जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। पिज्जा, बर्गर, मोमोज, नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक के बच्चे से लेकर बड़े तक दीवाने हैं। शहर में गली-गली खुली फास्ट फूड की दुकानों और ठेलों पर शाम ढलते ही भीड़ उमड़ती है, जहां लोग चटखारे ले-ले कर इनका सेवन करते हैं।

परिणामस्वरूप, लोग हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, कैंसर और आंतों की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अमरोहा में 16 वर्षीय किशोरी अहाना की जान फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से चली गई। फास्ट फूड के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाव के लिए जागरूकता ही एकमात्र उपाय है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फास्ट फूड व जंक फूड में प्रिजर्वेटिव की मात्रा बहुत अधिक होती है और यह सेहत के लिए हानिकारक हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से शरीर को गंभीर नुकसान होता है। कुछ प्रिजर्वेटिव कार्सिनोजेनिक (कैंसरकारी) भी होते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है। फास्ट फूड में फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या होती है, जो आंतों पर दबाव डालकर उन्हें बड़ा कर सकती है। इससे बच्चों में एनल फिशर और बवासीर की संभावना बढ़ जाती है। यदि दो वर्ष की उम्र से बच्चों को फास्ट फूड दिया जाए, तो इसका असर उनके स्वास्थ्य पर 20 से 25 वर्ष की उम्र में दिखने लगता है।

फास्ट फूड में मैदे, चीनी और रिफाइंड का इस्तेमाल होता है। मैदा आंतों में चिपक जाता है। पिज्जा, बर्गर, ब्रेड और फ्रेंच फ्राइज़ जैसे खाद्य पदार्थों में फाइबर बिल्कुल नहीं होता। पेट भरने के लिए फास्ट फूड का सेवन सेहत के लिए कतई अच्छा नहीं है। इससे मोटापा, वजन बढ़ना, हृदय रोग, कमजोर इम्यूनिटी और मधुमेह जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।

आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करने पर ऐसे केमिकल बनाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं और एंडोक्राइन सिस्टम को नियंत्रित करते हैं। लेकिन, अधिक तला-भुना, फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन करने पर आंतों के बैक्टीरिया ऐसे केमिकल बनाते हैं जिनसे मानसिक विकार पैदा हो सकता है और आंतों को भी क्षति पहुंचती है।

कई अभिभावक बच्चों को छह-सात माह का होने पर ही नूडल्स या कोल्ड ड्रिंक देने लगते हैं। कुछ माता-पिता सख्ती करते हैं तो दादा-दादी लाड़-प्यार में बच्चों को फास्ट फूड खिला देते हैं। यदि बच्चे फास्ट फूड के लिए जिद करें, तो उन्हें इसके दुष्प्रभावों के बारे में समझाना चाहिए और घर का बना पौष्टिक खाना खिलाना चाहिए। सप्ताह में एक बार फास्ट फूड का सेवन सीमित मात्रा में किया जा सकता है।

फास्ट फूड में पोषक तत्व न के बराबर होते हैं और केवल स्वाद ही मुख्य होता है। इसमें प्रोटीन की भारी कमी होती है और केवल कार्बोहाइड्रेट की अधिकता होती है। कार्बोहाइड्रेट के कारण शरीर में इंसुलिन का स्तर और फैट बढ़ता है। नसों में फैट जमा होने से हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं होती हैं, जबकि दिमाग की नसों में जमा होने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

फास्ट फूड में कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट, फैट और ट्रांसफैट की मात्रा अधिक होती है, जबकि विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन और फाइबर नहीं होता है। मैदे से बने पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। बच्चों व बड़ों को घर में गेहूं, जौ, रागी जैसे अनाजों के आटे से बने खाद्य पदार्थ देने चाहिए। बाजार के कैचअप के बजाय घर में टमाटर से कैचअप बनाना बेहतर है।

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