मुजफ्फरपुर नर्सिंग कॉलेज में शिक्षा व्यवस्था फेल: 120 छात्रों पर सिर्फ 2 टीचर, भविष्य पर संकट
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच बीएससी नर्सिंग कॉलेज में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। पिछले दो वर्षों से संचालित इस कॉलेज में 120 छात्रों ने नामांकन तो ले लिया है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए मात्र दो शिक्षक ही उपलब्ध हैं। यह स्थिति भारतीय नर्सिंग परिषद के मानकों का घोर उल्लंघन है, जिसके तहत छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखना अनिवार्य है।
छात्रों के भविष्य पर गहराता संकट
कॉलेज के पहले बैच का पहला शैक्षणिक सत्र बिना फैकल्टी के ही बीत गया। दूसरे सत्र में भी 60 नए छात्रों ने दाखिला ले लिया है। चार साल के इस कोर्स के पहले दो साल यूं ही बीतते देख विद्यार्थियों में निराशा और नाराजगी है। शिक्षकों की कमी के कारण न तो पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो पा रहा है और न ही छात्र आवश्यक कौशल सीख पा रहे हैं। इससे उनकी डिग्री की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं और नौकरी मिलने में कठिनाई हो सकती है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
आश्चर्य की बात यह है कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन इस कॉलेज में नर्सिंग बीएससी के नौ विभागों की पढ़ाई केवल दो शिक्षकों के भरोसे चल रही है। प्राचार्य द्वारा कई बार शिक्षकों की मांग की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। कॉलेज में न तो प्रयोगशाला है और न ही पुस्तकालय। सात विभागों के लिए विभागाध्यक्ष और शिक्षकों की आवश्यकता है। कार्यालय स्टाफ की कमी से भी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
नियमों का उल्लंघन और परिणाम
नियमों का उल्लंघन कर केवल दो शिक्षकों के सहारे कॉलेज का संचालन छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। अनुभवी शिक्षकों के बिना छात्र अस्पताल के महत्वपूर्ण कौशल नहीं सीख सकते। इससे न केवल उनकी नौकरी की संभावनाएं कम होंगी, बल्कि परीक्षा के नतीजों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। छात्रों को नेशनल यूजर आईडी रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने में भी समस्या आ सकती है।
