8 साल बाद मिला इंसाफ: 9 वर्षीय भाई के हत्यारे को बहन की गवाही से उम्रकैद
आगरा में आठ साल पहले एत्माद्दौला थाने के पास एक नौ वर्षीय बच्चे की गला काटकर हत्या करने के मामले में अदालत ने पूर्व किरायेदार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फिंगर प्रिंट और खून की रिपोर्ट के साथ-साथ बहन की गवाही ने दोषी को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चे की हत्या उस समय की गई जब वह घर पर अकेला था, और पूर्व किरायेदार चोरी के इरादे से घर में घुसा था।
कटरा वजीर खां में रहने वालीं दीपांशी गौतम 17 नवंबर 2017 की शाम 5:20 बजे बेटी यशिका के साथ सीता नगर मंडी में सब्जी लेने के लिए गई थीं। कार्टून देखने के लिए नौ वर्षीय पुत्र क्रिश अकेला रह गया था। 25 मिनट बाद मां-बेटी जब घर लौटे तो क्रिश का शव घर में चादर और दरी में लिपटा मिला था। बच्चे की आरी के ब्लेड से गला काटकर निर्मम हत्या की गई थी।
बेटी यशिका ने पूर्व किरायेदार आयुष शर्मा को घर से निकलते देखे जाने और उसका हाथ खून से लाल होने की जानकारी पुलिस को दी थी। इसके बाद पुलिस ने आयुष शर्मा को गिरफ्तार किया। निशानदेही पर खून के छींटे युक्त जैकिट व जूते बरामद किए थे। एडीजीसी योगेश कुमार बघेल द्वारा वादी मुकदमा मां दीपांशी गौतम, पिता अमर गौतम, पुत्री यशिका के अलावा 14 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। मुकदमे के विचारण के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि आयुष चोरी के इरादे से घर में घुसा था। क्रिश ने उसे पहचान लिया था, इस पर उसने हत्या कर दी। एडीजे 21 विराट कुमार श्रीवास्तव ने गवाहों के बयानों, फिंगर प्रिंट रिपोर्ट, आयुष की जैकेट और जूतों पर मिले खून के नमूनों के एक ही होने की रिपोर्ट के आधार पर आयुष को आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
