गेहूं खरीद में बोरों की कमी दूर करेगी योगी सरकार, कैबिनेट ने दी सीधी खरीद को मंजूरी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण जूट के बोरों की आपूर्ति में बाधा और कीमतों में वृद्धि की आशंका के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं की खरीद के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने उचित दर विक्रेताओं से सीधे जूट के बोरे खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य ई-टेंडरिंग और जेम पोर्टल के माध्यम से खरीद में लगने वाले समय को बचाना और यह सुनिश्चित करना है कि किसानों से गेहूं की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, किसानों से गेहूं की खरीद निर्बाध रूप से जारी रहे, इसके लिए पर्याप्त बोरों का इंतजाम करना आवश्यक है। उचित दर विक्रेताओं के पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से खाली हुए लगभग 20 हजार से 25 हजार गांठ जूट के बोरे उपलब्ध होने की संभावना है। यदि इन बोरों की खरीद ई-टेंडर या जेम पोर्टल के माध्यम से की जाती, तो इसमें काफी समय लग सकता था, जिससे बोरों की कमी के कारण गेहूं खरीद प्रभावित हो सकती थी। इसलिए, गेहूं की खरीद को सुचारू बनाए रखने के लिए तत्काल इन बोरों की सीधी खरीद की जा रही है।
वर्तमान में, उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में स्थापित 464 गेहूं क्रय केंद्रों पर किसानों से 13,388 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। कुल 6,500 क्रय केंद्रों के मुकाबले 5,439 क्रय केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी गई है। भारत सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 10 लाख मीट्रिक टन रखा है, लेकिन उम्मीद है कि इस बार 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद होगी।
खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में, राज्य क्रय एजेंसियों के अधिकारियों ने गेहूं खरीद की प्रगति और क्रय केंद्रों में वृद्धि के उपायों पर चर्चा की। भारत सरकार द्वारा 76,000 नए पीपी गांठ बोरों का आवंटन किया गया है, और 10,000 बोरों का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है। अब राज्य सरकार द्वारा उचित दर विक्रेताओं से बोरे खरीदने की अनुमति मिलने से खरीद प्रक्रिया को और गति मिलेगी। अधिकारियों को सुचारू रूप से गेहूं क्रय करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 47(1) के तहत कर अधिकारी के पद पर प्रयागराज में की गई तदर्थ नियुक्ति को न्यायालय के निर्देश पर विनियमित करने का भी निर्णय लिया है। यह कदम सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयासों को दर्शाता है, जिसका सीधा प्रभाव किसानों और आम जनता की सुविधा पर पड़ेगा।
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