उत्तर प्रदेश: 137 साल पुराने ऐतिहासिक Nadrai Aqueduct को मिलेगी नई मजबूती, संरक्षण कार्य शुरू
उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर नदरई जलसेतु को 137 वर्षों बाद नई मजबूती देने का कार्य शुरू हो गया है। वर्ष 1889 में निर्मित इस विश्वस्तरीय जलसेतु के दोनों ओर अब बोल्डर बांध के रूप में सुरक्षा कार्य कराया जा रहा है, जिससे इसकी नींव और संरचना को स्थायित्व मिल सके। यह निर्माण कार्य पहली बार वर्ष 2026 में शुरू हुआ है।
सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने शासन को 10 करोड़ से अधिक की कार्ययोजना भेजी थी, जिसमें सौंन्द्रर्यकरण का कार्य भी शामिल है। मुख्यमंत्री की ओर से इस कार्ययोजना की स्वीकृति और घोषणा की गई थी। प्रदेश सरकार ने इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री विशेष पैकेज के अंतर्गत बजट उपलब्ध कराया है।
ब्रिटिश काल में बने इस अद्भुत जलसेतु का निर्माण आयरलैंड के कॉर्क विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरों तथा तत्कालीन अभियंताओं की देखरेख में हुआ था। इसकी विशेषता यह है कि इस जलसेतु के ऊपर नहर बहती है, जबकि नीचे काली नदी प्रवाहित होती है, जो इसे इंजीनियरिंग का अनोखा नमूना बनाती है। जिस समय इसका निर्माण हुआ था, उस समय ब्रिटिश काल में इस जलसेतु के निर्माण की विदेशों में काफी चर्चा हुई थी।
संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद न केवल संरचना सुरक्षित होगी, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान भी और मजबूत होगी। नदरई जलसेतु पहले से ही देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद यहां पर्यटन और विरासत महत्व और बढ़ने की उम्मीद है।
