UP potato news: अमोनिया गैस संकट से कोल्ड स्टोरेज में आलू सड़ने का खतरा, किसानों पर दोहरी मार
उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों पर इस समय दोहरी मार पड़ रही है। बाजार में आलू के भाव नहीं मिल रहे हैं, जिससे किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसान अपना आलू कोल्ड स्टोरेज में रख रहे हैं, लेकिन अब कोल्ड स्टोरेज में भी आलू सुरक्षित नहीं है। खाड़ी युद्ध के कारण अमोनिया गैस का संकट पैदा हो गया है, जो कोल्ड स्टोरेज में तापमान नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक है।
आगरा और अलीगढ़ मंडल उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन का प्रमुख केंद्र हैं। आगरा मंडल में इस साल 1,75,950 हेक्टेयर में आलू की बुआई हुई थी। यहां के 332 कोल्ड स्टोरेज में 98 फीसदी आलू स्टोर किया जाता है। कोल्ड स्टोरेज मालिकों के अनुसार, अमोनिया गैस के बिना कोल्ड स्टोरेज का तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस बनाए रखना संभव नहीं है। वर्तमान में तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे आलू सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
कोल्ड स्टोरेज मालिकों का कहना है कि फरवरी में 60 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाली अमोनिया गैस अब ब्लैक मार्केट में 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है, लेकिन फिर भी उपलब्ध नहीं है। अमोनिया गैस की कमी का मुख्य कारण खाड़ी युद्ध के चलते आयात का बाधित होना बताया जा रहा है। भारत में अमोनिया के कच्चे माल का 70 फीसदी से अधिक आयात ईरान, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से होता है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए आगरा कोल्ड स्टोरेज ऑनर्स एसोसिएशन ने प्रदेश के उद्यान मंत्री को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने उर्वरक निर्माण इकाइयों को अमोनिया गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उद्यान विभाग के उप निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि अमोनिया गैस की कालाबाजारी करने वालों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उद्यान निदेशक भानु प्रकाश राम ने बताया कि सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को पत्र भेजा है, जिसमें किसान हित में कोल्ड स्टोरेज को अमोनिया गैस की आपूर्ति की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है।
