UP news: गवाही न देने वाले पुलिस अधिकारियों पर कोर्ट का सख्त रुख, वारंट जारी
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट ने लंबित मुकदमों में गवाही के लिए विवेचकों द्वारा रुचि न दिखाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में विवेचकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अत्यंत पुराने इन मामलों में अनावश्यक विलंब उचित नहीं है।
पहला मामला वर्ष 2003 का है, जो कृष्णानगर थाने से संबंधित है। इस मामले में तत्कालीन विवेचक प्रवीण कुमार राय, जो वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद पर तैनात हैं, को अभियोजन अभिलेख सिद्ध करने के लिए कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया था। इस पर गवाह ने व्यस्तता का हवाला देते हुए लंबी तारीख मांगी थी। अदालत ने विवेचक के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए उनके खिलाफ प्रक्रिया जारी करने के आदेश दिए।
दूसरा मामला वर्ष 2011 का है, जो सरोजनी नगर थाने में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज रिपोर्ट से संबंधित है। इस मामले में तत्कालीन विवेचक एवं अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार को गवाही दर्ज कराने के लिए उपस्थित होना था। अदालत ने पाया कि वह लगभग 12 वर्षों से जिरह के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं। उनके इस असहयोग पूर्ण रवैये के कारण मुकदमे की कार्यवाही वर्षों से आगे नहीं बढ़ सकी है। कोर्ट ने डॉ. संजय कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों के इस तरह के व्यवहार से न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। कोर्ट ने दोनों मामलों में अगली सुनवाई की तारीखें तय कर दी हैं।
