दिल्ली में इस बार रावण के साथ जलेगा 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला, जानिए क्या है अनोखी वजह | delhi news
दिल्ली में इस बार का दशहरा उत्सव बेहद खास होने जा रहा है। आमतौर पर विजयादशमी के मौके पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन राजधानी के पीतमपुरा में इस परंपरा में एक दिलचस्प बदलाव किया गया है। श्री केशव रामलीला समिति इस बार रावण की सेना के साथ एक विशाल कॉकरोच का पुतला भी आग के हवाले करने जा रही है। करीब 30 फीट ऊंचे इस पुतले को तैयार करने का काम जोर-शोर से चल रहा है, जिसमें पारंपरिक आतिशबाजी भी लगाई जाएगी।
आखिर रामलीला में कॉकरोच की एंट्री क्यों हुई और इसके पीछे क्या संदेश है, इसे लेकर आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह पुतला समाज में व्याप्त गंदगी का प्रतीक है। समिति के अध्यक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधि के अनुसार, घर या रसोई में कॉकरोच दिखते ही जिस तरह साफ-सफाई पर सवाल उठते हैं, उसी परिचित अनुभव को आधार बनाकर जनता को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जा रहा है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य ‘स्वच्छ भारत’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि लोग अपने आसपास की साफ-सफाई को लेकर अधिक जिम्मेदार बनें।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस समिति ने परंपरा से हटकर कुछ अलग किया हो। पिछले करीब 15 वर्षों से यह आयोजन समिति रावण दहन के साथ एक चौथा पुतला भी जलाती आ रही है, जो किसी न किसी गंभीर सामाजिक समस्या का प्रतीक होता है। इससे पहले आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं को भी पुतले के रूप में जलाया जा चुका है। आयोजकों का मानना है कि बुराई की शक्ल हर दौर में अलग होती है, और इस बार रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली गंदगी को निशाना बनाया गया है।
वर्तमान समय में दिल्ली में साफ-सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे लगातार बहस के केंद्र में रहते हैं। इस प्रतीकात्मक दहन से न केवल लोगों का ध्यान स्वच्छता की ओर आकर्षित होगा, बल्कि यह जनमानस में यह संदेश भी देगा कि केवल प्रशासन के भरोसे रहने की बजाय नागरिकों को भी अपनी आदतें सुधारनी होंगी। पुतला तैयार कर रहे स्थानीय कारीगरों के लिए भी यह एक नया और चुनौतीपूर्ण अनुभव है, जिसे विजयादशमी से पहले रामलीला मैदान में स्थापित किया जाएगा।
