शरजील इमाम की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने किया कड़ा विरोध, कोर्ट में चलाए वीडियो सबूत
वर्ष 2020 से न्यायिक हिरासत में चल रहे शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पुलिस ने अदालत में कई वीडियो सबूत पेश किए, जिनमें शरजील इमाम कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देते नजर आ रहे हैं। पुलिस का तर्क है कि 2020 में हुए दिल्ली दंगे कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के लागू होने के बाद केंद्र में सत्ता परिवर्तन लाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान, पुलिस ने सबूत के तौर पर वीडियो क्लिप अदालत में चलाए। इन वीडियो में से एक, जो 16 जनवरी 2020 का बताया जा रहा है और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का है, में शरजील इमाम एक समूह को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कहते सुनाई देते हैं, ‘अगर हम पांच लाख लोगों को इकट्ठा कर लें तो हम भारत और उत्तर-पूर्व को स्थायी रूप से काट सकते हैं। अगर स्थायी रूप से नहीं, तो कम से कम एक महीने के लिए ही सही।’
शरजील ने मेनलैंड इंडिया से पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा, ‘पटरियों पर इतना मलबा फैला दो कि उसे साफ करने में कम से कम एक महीना लग जाए। एयरफोर्स से होकर जाना पड़े। असम को काट देना हमारी जिम्मेदारी हैं यहां से सारी सप्लाई रोक दो। हम इसे रोक सकते हैं, क्योंकि चिकन नेक मुसलमानों का है।’
इन वीडियो में शरजील को अनुच्छेद 370, तीन तलाक, अयोध्या मंदिर, सीएए और एनआरसी जैसे केंद्र सरकार के विभिन्न कदमों के खिलाफ युवाओं को कथित तौर पर उकसाते हुए सुना जा सकता है। 23 जनवरी 2020 की एक अन्य वीडियो क्लिप में, शरजील मंच से भीड़ को संबोधित करते हुए कहते दिखाई देते हैं, ‘तो यह बात तय है कि हमला मुसलमानों पर है। आप जानते हैं कि अदालत ने बाबरी के बारे में क्या किया, कश्मीर के बारे में क्या किया। मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने मुस्लिम पुरुषों को जेल भेजने के लिए कानून बनाया। आपकी जमीन किसी और को दे दी। सीएए के बारे में भी वे यही करेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिल्ली पहुंचने में पांच मिनट लगते हैं।’
दिल्ली पुलिस के अनुसार, शरजील ने उस समय की परिस्थितियों का फायदा उठाया जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान दिल्ली की राजकीय यात्रा पर थे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। दिसंबर 2019 की एक क्लिप, जो दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया की है, में भी शरजील कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाबलों की कार्रवाई से न डरने और हर स्थिति का सामना करने के लिए उकसाते नजर आ रहे हैं। शरजील इमाम के खिलाफ यूएपीए की धारा 12 के तहत भी मामला दर्ज है, जिसमें अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है।
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