पुलिस पर फायरिंग केस में सीरियल किलर रुस्तम बरी, गवाहों के बयानों में विरोधाभास
लखनऊ की एक अदालत ने सीरियल किलर रुस्तम को सरोजनीनगर पुलिस पर गोलियां चलाने के मामले में बरी कर दिया है। यह घटना आठ अगस्त 2016 को आशियाना इलाके में हुई थी। सत्र अदालत के एडीजे प्रशांत बिलगैया ने अपने आदेश में पुलिस के गवाहों के बयानों में विरोधाभास को मुख्य कारण बताया। साक्ष्यों के अभाव और विवेचना में खामियों के चलते सीरियल किलर को बरी किया गया।
अदालत ने कहा कि पुलिस गवाहों के बयानों में कई विसंगतियां थीं, जैसे कि घटनास्थल पर पुलिस बल की संख्या, आरोपी के साथ मौजूद लोगों की संख्या, चलाए गए फायर और बरामद खोखों की संख्या। इन विरोधाभासों से यह निष्कर्ष निकलता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य विश्वसनीय नहीं थे।
यह मामला तब दर्ज हुआ था जब एक व्यवसायी शशि प्रकाश ने रुस्तम के खिलाफ रंगदारी मांगने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रुस्तम ने व्यवसायी से दस लाख रुपये की मांग की थी और न देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने जब रुस्तम को पकड़ने का प्रयास किया, तो उसने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं।
यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे न्याय प्रणाली में साक्ष्यों की मजबूती और गवाहों की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अपर्याप्त साक्ष्य या विरोधाभासी बयान गंभीर अपराधों में आरोपियों को बरी करवा सकते हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की सुरक्षा की भावना पर पड़ता है।
