दिल्ली में रहने का प्रमाण देने में असफल रहे सौरव दास, कोर्ट ने मांगा रेंट एग्रीमेंट | delhi news
दिल्ली में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के तहत कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पीस बॉन्ड भरने की प्रक्रिया के दौरान अदालत ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे राष्ट्रीय राजधानी में अपने निवास स्थान का पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत करें। हाल ही में सौरव दास और आशुतोष रांका को इस मामले में राहत मिली थी, लेकिन अब निवास प्रमाण से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण यह प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।
आज हुई अदालत की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सौरव दास की ओर से अब तक कोई भी रेंट एग्रीमेंट, डीड या लीज से जुड़ा दस्तावेज जमा नहीं कराया गया है। इस औपचारिकता को पूरा करने के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका अपने जमानतदारों के साथ अदालत में पेश हुए। दस्तावेजों की गहराई से जांच करने के लिए अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर के लिए तय की है, जिससे यह साफ होता है कि कानूनी प्रक्रिया अभी कुछ और दिन जारी रहेगी।
दूसरी ओर, इसी से जुड़े प्रदर्शन के एक अन्य मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपी AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कड़ा रुख अपनाते ہوئے ऐलान किया है कि भले ही उन्हें उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली हो, लेकिन वे किसी भी कीमत पर SEM अदालत में पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के बॉन्ड का इस्तेमाल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है।
नेहा बोरा ने आगे आरोप लगाया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के दावे के उलट धरातल पर बल प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान मीडियाकर्मियों को भी कठिनाइयों का सामना करने का जिक्र किया। उनके अनुसार, उन्हें जो नोटिस मिला था उसमें केवल आशंका जताई गई थी कि वे शांति भंग कर सकती हैं, लेकिन इसके समर्थन में कोई प्राथमिकी की प्रति नहीं दी गई। इस कानूनी खींचतान से आम जनता के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रशासनिक सख्ती को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
