दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मुफ्त किताबों की खरीद को लेकर राजनीतिक घमासान, आप ने लगाए गंभीर आरोप | delhi politics
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मुफ्त बांटी जाने वाली किताबों की खरीद प्रक्रिया और उनकी गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और छपाई में बड़े स्तर पर कमीशनखोरी का अंदेशा जताया है। इस विवाद के तूल पकड़ने से छात्रों की पढ़ाई और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, जिसका सीधा असर आम जनता और अभिभावकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
आप नेताओं ने बाजार में उपलब्ध किताबों और सरकारी टेंडर के तहत छपी किताबों की तुलना करते हुए कागज की गुणवत्ता, आकार और प्रिंटिंग पर सवाल खड़े किए। उनका दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में तय नियमों की अनदेखी की गई है। इस तरह के आरोपों से प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं, जिससे पारदर्शी नीतियों की मांग तेज हो गई है।
इन तमाम आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पलटवार किया और सभी दावों को बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किताबों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह नियमों के दायरे में और कम लागत पर उपलब्ध कराई गई हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान हुए कथित घोटालों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। सरकार जल्द ही इस मामले से जुड़े सभी तथ्य जनता के सामने रखेगी ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके।
