डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, महंगाई बढ़ने की आशंका; जानें Rupee vs Dollar का गणित
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये की इस कमजोरी से देश की अर्थव्यवस्था पर कई तरह के असर पड़ने की आशंका है। सबसे पहले, आयातित वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक, सभी के लिए अधिक भुगतान करना होगा। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि महंगाई (Inflation in India) बढ़ने की आशंका है।
रुपये की कमजोरी से विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा भी महंगी हो जाएगी, जिससे उन परिवारों का बजट प्रभावित होगा जिनके बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं।
रुपया क्यों हो रहा कमजोर?
रुपये की इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण विदेशी कोषों की लगातार निकासी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में अब तक रुपये में डॉलर के मुकाबले दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?
रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को फायदा होता है, क्योंकि उन्हें अपने निर्यात से अधिक रुपये मिलते हैं। हालांकि, यह फायदा सभी निर्यातकों को नहीं मिलता। जो निर्यातक अपने उत्पादों को बनाने के लिए आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं, उन्हें भारतीय मुद्रा के कमजोर होने से लाभ नहीं होगा। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-आयात वाले क्षेत्रों को कम लाभ होगा। वहीं, कपड़ा जैसे कम आयात निर्भरता वाले क्षेत्रों को कमजोर रुपये से सबसे अधिक फायदा होने की उम्मीद है।
