लखनऊ में तेज रफ्तार और नशे के कारण बढ़े सड़क हादसे, यातायात निदेशालय की रिपोर्ट का खुलासा
यातायात निदेशालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने लखनऊ मंडल के छह जिलों में सड़क हादसों की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ, उन्नाव और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, सीतापुर, हरदोई और रायबरेली में हादसों में कमी आई है। लखनऊ में वर्ष 2024-25 में 1049 हादसे हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 1074 हो गए। इस अवधि में लखनऊ में मृतकों की संख्या 99 से बढ़कर 128 और घायलों की संख्या 187 से बढ़कर 321 हो गई है।
सड़क हादसों के बढ़ते ग्राफ को नियंत्रित करने के लिए, संबंधित विभागों को ई-चेकिंग और ई-चालान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मंडलीय सड़क सुरक्षा की बैठकों में यातायात, पुलिस, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और चिकित्सा अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, लेकिन हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति अभी तक नहीं बन पाई है। यातायात निदेशालय ने तेज रफ्तार वाहनों और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए ई-चेकिंग बढ़ाने पर जोर दिया है।
रिपोर्ट में सड़क हादसों के तीन मुख्य कारणों का उल्लेख किया गया है: तय गति सीमा से अधिक तेज रफ्तार में वाहन चलाना, नशे की हालत में वाहन चलाना, और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना, खासकर सड़क और सिग्नल लाइट पर। लखनऊ में पिछले तीन महीनों में ट्रैफिक पुलिस ने बिना हेलमेट के 2,19,253 चालान काटे हैं, जो ट्रैफिक नियमों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।
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