आगरा में राज चौहान की हत्या: मां को एनकाउंटर का डर, जमानत के दिन ही वर्चस्व की लड़ाई में गई जान
आगरा में ‘रंगबाज’ के नाम से कुख्यात राज चौहान की जमानत के दिन ही वर्चस्व की लड़ाई में हत्या कर दी गई। उस पर हत्या, हत्या के प्रयास और मारपीट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज थे। दो दिसंबर को जेल से रिहा होने के बाद उसके शक्ति प्रदर्शन के लिए निकाले गए जुलूस पर भी एक नया मुकदमा दर्ज हुआ था।
अपराधिक वारदातों में बढ़ती संलिप्तता के कारण राज की मां को उसके एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसी डर के चलते, भले ही उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे गंभीर धाराओं वाले नहीं थे, मां ने शुक्रवार को ही राज की जमानत सुनिश्चित कराई थी। लेकिन जमानत वाले दिन ही उसकी हत्या ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया।
जेल से छूटने के बाद राज चौहान यमुना पार इलाके में होने वाली आपराधिक वारदातों में लगातार शामिल पाया जा रहा था। उसकी मां, नीरज देवी, इस बात से बेहद चिंतित थीं और उन्हें एनकाउंटर का डर सताता रहता था। उनके खिलाफ न्यू आगरा थाने में उपद्रव और लापरवाही से वाहन चलाने जैसे सामान्य धाराओं में मुकदमे दर्ज थे, जिनमें सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद, मां लगातार राज से जमानत कराने की गुहार लगा रही थीं।
जब राज खुद जमानत के लिए नहीं आया, तो उसकी मां शुक्रवार को उसे लेकर न्यायालय पहुंचीं। अधिवक्ता की मदद से उसे जमानत मिल गई। हालांकि, जमानत मिलने के तुरंत बाद वह अपने साथियों के साथ दीवानी से चला गया और अपने अधिवक्ता से भी नहीं मिला।
राज का गैंग लगातार बढ़ रहा था और हर समय उसके साथ साथियों की एक बड़ी फौज रहती थी। जेल से रिहाई के बाद निकाले गए जुलूस में भी सैकड़ों युवक कारों और बाइकों के साथ शामिल हुए थे। लेकिन हत्या के बाद उसके कोई भी साथी नजर नहीं आए। पोस्टमार्टम हाउस पर शनिवार को केवल चार लोग मौजूद थे, जो उसके रिश्तेदार थे, न कि उसके गैंग के सदस्य। इस घटना ने शहर में अपराध और गैंगवार की स्थिति पर चिंता बढ़ा दी है।
