अलीगढ़ में नियो-कॉन सम्मेलन में नवजात स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीकों पर मंथन | aligarh news
चिकित्सा विज्ञान में नवजात शिशु देखभाल और बाल रोग सबसे संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। अलीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन ‘नियो-कॉन’ में देश भर के शीर्ष चिकित्सकों ने शिरकत की। यह आयोजन स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों और नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है [aligarh news]।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने समय पूर्व जन्म और कम वजन वाले बच्चों की जीवन रक्षा प्रणाली पर गहन मंथन किया। चर्चा में यह बात सामने आई कि नवजात शिशुओं की उत्तरजीविता में सुधार केवल उन्नत दवाओं से नहीं, बल्कि समय पर निदान और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के त्वरित अंगीकरण से संभव है। सरफैक्टेंट थेरेपी, नॉन-इन्वेसिव वेंटिलेशन और कूलिंग थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से होने वाले नुकसान को रोकने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के पहले 60 सेकंड नवजात के जीवन के लिए अति संवेदनशील होते हैं। इस दौरान त्वरित रिससिटेशन और थर्मल मैनेजमेंट बेहद जरूरी है। इसके अलावा, कंगारू मदर केयर को कम वजन वाले बच्चों के लिए वरदान बताया गया। इस तरह के आयोजनों से टियर-2 और टियर-3 शहरों के चिकित्सकों को वैश्विक स्तर पर हो रहे अनुसंधानों की जानकारी मिलती है, जिससे अंततः ग्रामीण स्तर तक के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार होता है।
