पांच वर्षों में 23 संगठन प्रतिबंधित, सिमी और पीएफआई प्रमुख
नई दिल्ली: देश की सुरक्षा को मजबूत करते हुए, केंद्र सरकार ने पिछले पांच वर्षों में 23 से अधिक संगठनों को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित इस्लामिक माड्यूल स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के साथ-साथ कई अन्य संगठनों को इस अवधि में प्रतिबंधित किया गया है।
मंत्री के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में गैरकानूनी घोषित होने वाला पहला संगठन सिमी था, जबकि नवीनतम यानी 23वां प्रतिबंधित संगठन अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) है। इस सूची में PFI और उसके सहयोगी संगठनों जैसे रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वुमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल भी शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना है।
इसके साथ ही, गृह राज्य मंत्री ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की सराहनीय उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। 26/11 मुंबई हमले के बाद स्थापित एनआईए आज एक विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के रूप में उभरी है। मंत्री ने बताया कि एनआईए की स्थापना के बाद से दर्ज किए गए कुल 692 मामलों में से 172 मामलों में दोषसिद्धि दर 92.44 प्रतिशत रही है, जो एजेंसी की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
सरकार आतंकवाद से लड़ने के लिए एनआईए को लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में, एनआईए में ISIS जांच अनुसंधान प्रकोष्ठ (IIRC) का दायरा बढ़ाकर और उसका नाम आतंकवाद निरोधक अनुसंधान प्रकोष्ठ (CTRC) कर दिया गया है, ताकि आतंकवाद के अन्य क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मानव तस्करी रोधी प्रभाग (AHTD), साइबर आतंकवाद रोधी प्रभाग (ACTD), वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) प्रकोष्ठ, वित्तीय विश्लेषण इकाई (FAU) और कानूनी विशेषज्ञों वाला एक विशेष प्रकोष्ठ भी स्थापित किया गया है।
बड़े डेटा विश्लेषण और जांच प्रक्रियाओं के स्वचालन व डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए, एनआईए में एक विशेष इकाई – राष्ट्रीय आतंकवाद डेटा फ्यूजन और विश्लेषण केंद्र (NTDFAC) की स्थापना की गई है। यह केंद्र पर्यवेक्षण को मजबूत करेगा और दक्षता, स्थिरता तथा जवाबदेही को बढ़ाएगा। इन कदमों से भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और अधिक प्रभावी ढंग से जारी रख सकेगा।
