चेक-इन सिस्टम ठप होने से एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स में देरी, यात्रियों को हुई परेशानी
मंगलवार शाम को देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर चेक-इन सिस्टम में आई अचानक तकनीकी खराबी के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस गड़बड़ी के चलते कई एयरलाइंस की उड़ानों में देरी हुई, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
एअर इंडिया ने इस समस्या पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि यह खराबी एक थर्ड-पार्टी सिस्टम में आई थी। एयरलाइन ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर यात्रियों को सूचित किया कि उनकी टीम यात्रियों को सुगम चेक-इन अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रही है। हालांकि सिस्टम धीरे-धीरे सुधर रहा था, लेकिन इसका असर कुछ उड़ानों पर बना रहा। एयरलाइन ने यात्रियों से आग्रह किया कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति की जानकारी वेबसाइट पर अवश्य जांच लें और यात्रा के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलें।
देर रात, एअर इंडिया ने एक अपडेट जारी करते हुए बताया कि चेक-इन सिस्टम अब पूरी तरह से सामान्य हो गया है और सभी उड़ानें अपने निर्धारित समय पर संचालित हो रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह तकनीकी समस्या लगभग 45 मिनट तक चली, जिसके बाद इसे सफलतापूर्वक ठीक कर लिया गया।
एयरलाइन ने एक बयान में कहा, “थर्ड-पार्टी सिस्टम पूरी तरह बहाल हो चुका है। सभी हवाई अड्डों पर चेक-इन प्रक्रिया सामान्य है और हमारी सभी उड़ानें तय समय के अनुसार चल रही हैं। हम यात्रियों के धैर्य और सहयोग के लिए धन्यवाद करते हैं।” इससे पहले, एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया था कि सिस्टम में आई इस दिक्कत के कारण कई एयरलाइंस की उड़ानों पर असर पड़ा है और कुछ फ्लाइट्स में देरी की आशंका है।
इंडिगो की कुछ उड़ानों में भी देरी देखी गई, हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह ऑपरेशनल कारणों से हुई थी। यह तकनीकी धीमापन Amadeus सॉफ्टवेयर से जुड़ा बताया गया, जो एयरलाइन उद्योग में बुकिंग, रिजर्वेशन, इन्वेंट्री और डिपार्चर कंट्रोल जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने संसद को सूचित किया था कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास आने वाली कुछ उड़ानों ने जीपीएस स्पूफिंग की घटनाओं की रिपोर्ट की थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इन घटनाओं का किसी भी उड़ान संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि दूसरे रनवे पारंपरिक नेविगेशन सिस्टम के साथ सामान्य रूप से काम कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, 6 नवंबर को दिल्ली हवाई अड्डे पर लगभग 800 उड़ानों में देरी हुई थी, जो जीपीएस या जीएनएसएस स्पूफिंग के कारण हो सकती है। जीपीएस स्पूफिंग का अर्थ है गलत नेविगेशन सिग्नल भेजकर किसी विमान की दिशा या लोकेशन को भटकाना, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
