भारतीय रिजर्व बैंक ने चार साल में पहली बार बढ़ाया रेपो रेट, महंगी होगी ईएमआई | national news
भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद देशवासियों को बड़ा झटका देते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। लंबे समय से 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहे रेपो रेट को 25 बीपीएस बढ़ाकर अब 5.50 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक के इस अहम फैसले के बाद कमर्शियल बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और होम तथा कार लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी।
आरबीआई गवर्नर ने बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल, वेस्ट एशिया के संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का खतरा फिर से मंडराने लगा है। इसे देखते हुए मौद्रिक नीति के रुख को भी न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई पर प्रभावी लगाम लगाना है। इसके साथ ही वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई यानी सीपीआई के अनुमान को भी बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है।
महंगाई के मोर्चरी पर भले ही चुनौतियां बढ़ गई हों, लेकिन देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर केंद्रीय बैंक ने सकारात्मक रुख दिखाया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर तुरंत प्रभाव से बाजार पर पड़ेगा और उपभोक्ताओं को अपने मासिक बजट में बदलाव करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लघु अवधि में दरों में कटौती की उम्मीद बेहद कम है।
