दिल्ली में मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल, पूर्व राजनयिकों ने जताई नाराजगी | delhi news
दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए चलाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया इन दिनों प्रशासनिक अमले के साथ-साथ आम जनता के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इस प्रक्रिया की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब देश के पूर्व राजनयिक भी इसके खिलाफ खुलकर सामने आने लगे हैं। पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित आईएफएस अपार्टमेंट में रहने वाले कई सेवानिवृत्त राजनयिक परिवारों को इस वेरिफिकेशन को पूरा करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है (delhi news)।
वरिष्ठ राजनयिक जी पार्थसारथी का नाम लंबी मतदान पृष्ठभूमि होने के बावजूद ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में डाल दिया गया, जिसके बाद उन्हें बूथ लेवल अधिकारी की मदद लेनी पड़ी। उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए नाराजगी जताई। उनकी बेटी रुक्मिणी पार्थसारथी ने भी इस प्रणाली को समावेशी के बजाय लोगों को मताधिकार से वंचित करने वाली बताया। इसी तरह पूर्व राजदूत कैलाश अग्रवाल का कहना है कि जब पढ़े-लिखे और जागरूक वर्ग के लोगों के लिए इस प्रक्रिया को समझना कठिन हो रहा है, तो आम नागरिकों और विशेषकर बुजुर्गों का क्या हाल होगा, यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह पूरी व्यवस्था ऐसे समय में सवालों के घेरे में है जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि नोटिस मिलने का अर्थ नाम काटना नहीं बल्कि दस्तावेजों का सत्यापन करना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर संज्ञान लिया है कि क्या बिना सोचे-समझे नोटिस जारी किए जा रहे हैं और चुनाव आयोग से इसमें सुधार की गुहार लगाई गई है। इस तरह की प्रशासनिक जटिलताओं का सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है, जिससे पारदर्शी और सुगम चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।
