मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर एनडीए में घमासान, सहयोगियों ने मांगी सफाई | national politics news
भारतीय निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेदों और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े ताजा खुलासों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विपक्ष के हमलों के बाद अब केंद्र में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तीन प्रमुख सहयोगी दलों ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्पष्टीकरण की मांग की है। इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है (national politics news)।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने खुलकर इस बात पर जोर दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि है। नेताओं का मानना है कि इस विवाद से आम जनता के मन में चुनावी प्रणाली को लेकर संशय पैदा हो रहा है, जिसे दूर करना आयोग की नैतिक जिम्मेदारी है ताकि लोकतंत्र की नींव कमजोर न हो।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन तमाम दावों और मीडिया रिपोर्ट्स का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि संस्था के भीतर वैचारिक मतभेद सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, एसआईआर से जुड़े सभी अंतिम निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति के बाद ही लिए गए थे और इसके सभी आदेश कानूनी रूप से मान्य हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा अटूट बनाए रखने के लिए इस तरह के मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी मानी जाती है।
