कब से शुरू हो रहा है पितृपक्ष, जानिए पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध की सही तिथि | religion news
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष का विशेष समय आ गया है, जिसे कनागत या श्राद्धपक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण तथा ब्राह्मण भोजन कराते हैं। इस बार पितृपक्ष की तारीखों को लेकर लोगों में संशय है कि पहला श्राद्ध किस दिन किया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा।
पंचांग के जानकारों के मुताबिक 26 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। जिन पूर्वजों का देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ था, उनका श्राद्ध इसी दिन होगा। इसके ठीक अगले दिन यानी 27 सितंबर को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ मुख्य पितृपक्ष की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। इस दिन प्रतिपदा तिथि पर जिन लोगों के परिजनों का निधन हुआ था, वे लोग अपना पहला श्राद्ध संपन्न करेंगे। इस प्रकार तिथियों के क्षय और वृद्धि के चलते इन दो दिनों में यह स्थिति बनी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के इन सोलह दिनों में शुभ कार्यों की मनाही होती है और पूरा ध्यान पितरों की तृप्ति पर केंद्रित रहता है। यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात न हो, तो वह पखवाड़े के अंतिम दिन यानी 10 अक्टूबर को पड़ने वाली सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर श्राद्ध और तर्पण कर सकता है। इस दिन सभी अज्ञात पूर्वजों के नाम से अनुष्ठान करने का विधान है, जिससे पूरे परिवार पर पितृ कृपा बनी रहती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
