यमुना नदी में मिले दुर्लभ कछुओं के घोंसले, वन विभाग के सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा | agra news
आगरा के पास यमुना नदी के जलीय जीवन के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण संस्था की संयुक्त टीम द्वारा किए गए विस्तृत सर्वे में यमुना नदी के रेतीले टापुओं पर संकटग्रस्त नैरो-हेडेड साफ्टशेल कछुए (चित्रा इंडिका) के 20 घोंसले खोजे गए हैं। इन घोंसलों में लगभग 1500 अंडे सुरक्षित पाए गए हैं। यह प्रजाति गंगा के मैदानी इलाकों में मीठे पानी के सबसे ज्यादा संकटग्रस्त जीवों में गिनी जाती है, ऐसे में इनका प्राकृतिक रूप से पनपना पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है [agra news]।
यह विशेष सर्वे कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार से शुरू होकर कछवारा घाट तक संचालित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों को मीठे पानी के कछुओं की कुल पांच अलग-अलग प्रजातियां और लगभग 35 प्रकार के प्रवासी व स्थानीय पक्षी भी नजर आए। यह इस बात का प्रमाण है कि अथक प्रयासों के बाद यमुना नदी के कुछ हिस्से अब भी जलीय जीवों और पक्षियों के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित हो रहे हैं। चंबल नदी की तर्ज पर अब यमुना में भी कछुओं के प्रजनन स्थलों का मिलना संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
स्थानीय प्रभागीय वनीकरण अधिकारी ने इस सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इतनी बड़ी संख्या में घोंसलों का मिलना इस बात का संकेत है कि वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। नदी के इन संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि अंडों और नवजात जीवों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। आने वाले दिनों में इस सर्वे का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि अन्य प्रजनन स्थलों की भी पहचान की जा सके।
पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि यमुना के इन प्राकृतिक आवासों को मानवीय हस्तक्षेप से बचाकर संरक्षित रखा गया, तो वह दिन दूर नहीं जब यह नदी अपनी खोई हुई समृद्ध जैव विविधता को पूरी तरह वापस पा लेगी। आम जनता और स्थानीय प्रशासन के साझा प्रयासों से जलीय जीवों का यह प्राकृतिक संरक्षण पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
