निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की कानूनी जंग और बरी होने की पूरी कहानी | crime news
निठारी हत्याकांड के चर्चाओं में रहे सुरेंद्र कोली का मामला भारतीय न्याय प्रणाली के सबसे जटिल मामलों में से एक रहा है। नोएडा के बहुचर्चित D-5 बंगले पर हुए इन सनसनीखेज मामलों में निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी सुनवाई चली, जहां उसे कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी [crime news]। साल 2014 में मेरठ जेल में उसकी फांसी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन अंतिम समय में कानूनी हस्तक्षेप के कारण उसकी सजा पर रोक लग गई थी।
समय के साथ अदालती प्रक्रिया में जांच की कमियों और साक्ष्यों के आधार पर कानूनी पेंच बदलते चले गए। बचाव पक्ष की दलीलों के बाद अदालतों ने पुलिस हिरासत में लिए गए बयानों और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। इसके बाद अदालतों के फैसलों में आए बदलाव के चलते सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में बरी कर दिया गया, जिसके बाद उसने लंबी कैद से मुक्ति पाई और वह हरिद्वार में सामान्य जीवन जीने लगा था। इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामलों से समाज में न्याय प्रणाली और पुलिस जांच की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि प्रत्येक मामले में ठोस सबूतों का होना कितना आवश्यक है।
