सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइंस: हिंसा, ड्रग्स और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर सख्त नियम | national news
फिल्मों के पर्दे पर आने से पहले उनकी रूपरेखा तय करने वाले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपनी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को और अधिक कड़ा कर दिया है। हाल ही में गठित 18 सदस्यीय नए बोर्ड के नेतृत्व में आई इन संशोधित गाइडलाइंस का असर अब सीधे तौर पर सिनेमाई कंटेंट पर दिखाई देगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मनोरंजन के नाम पर समाज में नकारात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा न मिले [national news]।
नई नियमावली के अनुसार, किसी भी फिल्म में ऐसी सामग्री या संवाद नहीं होने चाहिए जिससे भारत के अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़े। खासकर सीमावर्ती तनाव या कूटनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को अब सेंसर बोर्ड की पैनी नजर से गुजरना होगा। इसके अलावा, फिल्मों में हिंसा के अतिरेक और उसके महिमामंडन पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। अपराध के तौर-तरीकों (Modus Operandi) को इस प्रकार पेश करने की अनुमति नहीं होगी जो युवाओं या दर्शकों को अपराध की तरफ आकर्षित करे।
ड्रग्स और नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर भी बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी दृश्य में मादक पदार्थों का इस्तेमाल दिखाया जाता है, तो स्क्रीन पर अनिवार्य रूप से वैधानिक चेतावनी यानी ‘Say No To Drugs’ का डिस्क्लेमर दिखाना होगा। इसके साथ ही, धार्मिक और सामाजिक संवेदनाओं, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध तथा सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाले दृश्यों पर भी कैंची चलाई जा सकती है। फिल्मों के टाइटल्स को लेकर भी नियमों को सख्त किया गया है ताकि किसी की भावनाओं को ठेس न पहुंचे।
दर्शकों की आयु सीमा को ध्यान में रखते हुए सेंसर बोर्ड ने अब यूए (UA) कैटेगरी को भी उप-श्रेणियों जैसे UA 7+, UA 13+ और UA 16+ में बांट दिया है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों के लिए सही कंटेंट का चुनाव कर सकें। इन कड़े नियमों से फिल्म निर्माताओं को अब अपनी कहानियों को पर्दे पर उतारने से पहले अधिक सावधानी बरतनी होगी।
