भारतीय रुपये के प्रतीक चिन्ह ‘₹’ का दिलचस्प इतिहास और उसकी पहचान की कहानी | general news
भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान के प्रतीक के रूप में उपयोग होने वाले रुपये के चिन्ह ‘₹’ ने देश को एक नई आर्थिक पहचान दी है। आज यह चिन्ह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 2010 से पहले हमारी करेंसी की पहचान बिल्कुल अलग थी? उस समय रुपये को दर्शाने के लिए ‘Rs’ या ‘INR’ जैसे संक्षिप्त रूपों का इस्तेमाल किया जाता था। [general news]
इस असमंजस को दूर करने और भारतीय मुद्रा को एक अनूठी पहचान देने के लिए केंद्र सरकार ने साल 2009 में एक खुली प्रतियोगिता का आयोजन किया था। देश भर से हजारों डिजाइन आए, जिनमें से आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर डी. उदय कुमार द्वारा तैयार किया गया डिजाइन अंतिम रूप से चुना गया। देवनागरी लिपि के ‘र’ और रोमन लिपि के ‘R’ को मिलाकर बनाए गए इस चिन्ह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रुपये को एक विशिष्ट मान दिलाया।
इस ऐतिहासिक बदलाव से न केवल वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत होती स्थिति को बल मिला, बल्कि देश की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को भी एक नया आयाम प्राप्त हुआ। भविष्य में यह प्रतीक डिजिटल ट्रांजैक्शन और आधुनिक आर्थिक सुधारों के दौर में देश की वित्तीय स्वावलंबन का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।
