जन्माष्टमी पर दयालबाग में विशेष भंडारा, देशभर से जुटेंगे अनुयायी; radhasoami faith की तैयारियां पूरी
आगरा के दयालबाग में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर राधास्वामी मत के संस्थापक हुजूर स्वामीजी महाराज का पावन भंडारा श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव से मनाया जाएगा। इस वर्ष दो से छह सितंबर तक भंडारा सप्ताह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश की विभिन्न शाखाओं से अनुयायी शामिल होंगे।
हुजूर स्वामीजी महाराज राधास्वामी मत के आद्य प्रवर्तक और प्रथम संत सतगुरु माने जाते हैं। उनका जन्म जन्माष्टमी की रात्रि 1818 में आगरा में हुआ था। उनके जीवन को मानव-मात्र के आध्यात्मिक कल्याण और जीवों को परम धाम की ओर ले जाने वाले मार्ग के प्रकटीकरण के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने गृहस्थ जीवन में रहते हुए आध्यात्मिक उन्नति का सहज मार्ग बताया, जिसमें सुमिरन, ध्यान, भजन, सेवा और सत्संग के साथ सांसारिक दायित्वों के निर्वहन पर बल दिया गया।
स्वामीजी महाराज ने 15 फरवरी 1861 को सामान्य जिज्ञासुओं और गृहस्थों के लिए सत्संग के द्वार खोले। उनके वचनों को बाद में ‘सार वचन’ के रूप में संकलित किया गया। 15 जून 1878 को उन्होंने नश्वर चोला त्यागकर निजधाम प्रस्थान किया। इसके बाद सत्संग की जिम्मेदारी उनके प्रमुख शिष्यों ने संभाली और यह आध्यात्मिक परंपरा आज भी जारी है।
भंडारा दिवस पर सुबह आरती के बाद खेतों पर भंडारा आयोजित होगा। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बंगाल, ओडिशा, पूर्वी राज्यों के साथ यूरोप की अनुमत शाखाओं से सत्संगी अनुयायी और पंजीकृत जिज्ञासु दयालबाग पहुंचेंगे। भंडारा सप्ताह के दौरान सेवा, सत्संग और आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष वातावरण रहेगा। मीडिया प्रभारी जितेन्द्र कांत शर्मा ने बताया कि भंडारा सप्ताह को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
