मायावती का 70वां जन्मदिन: अस्तित्व की लड़ाई और ‘ब्लू बुक’ में नया ‘सक्सेस मंत्र’
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। यह जन्मदिन उनके लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बसपा के वजूद को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी के नेता अभी से सक्रिय हो गए हैं और मंडल मुख्यालयों पर शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है। बसपा इस दिन को ‘जन कल्याणकारी दिवस’ के रूप में मना रही है, और संभव है कि मायावती आगे की रणनीति पर एक रोडमैप भी पेश करें।
कांशीराम ने 1984 में बसपा की स्थापना की थी और मायावती को राजनीति में लाकर उनकी जिंदगी बदल दी। कांशीराम ने 2001 में उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। आज मायावती लाखों दलितों की ‘बहनजी’ के रूप में जानी जाती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हें ‘लोकतंत्र का चमत्कार’ कहा था।
मायावती के छोटे बाल (Short Hair) उनके व्यक्तित्व की एक पहचान हैं। राजनीति के शुरुआती दौर में कई जनसभाएं करने के दौरान लंबे बालों को संवारने में लगने वाले समय को बचाने के लिए उन्होंने बाल कटवा लिए थे। उनकी कार्यशैली ने उन्हें भारतीय राजनीति में ‘दलितों की मसीहा’ और ‘आयरन लेडी’ के रूप में स्थापित किया है।
मायावती का राजनीतिक सफर ‘गेस्ट हाउस कांड’ के बिना अधूरा है। 1995 में लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिससे उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर बचाया था। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति काफी सख्त रही। 2007 में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के दम पर उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर सभी को चौंका दिया था।
हालांकि, वर्तमान में पार्टी की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली मायावती के पास वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में केवल एक विधायक है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को कोई सीट नहीं मिली। राज्यसभा में भी उनका एकमात्र सांसद का कार्यकाल इसी साल समाप्त हो रहा है, जिससे संसद के किसी भी सदन में बसपा का प्रतिनिधित्व न होने का खतरा है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने का संकट भी मंडरा रहा है।
आज अपने जन्मदिन पर, मायावती अपनी आत्मकथा के 21वें भाग ‘ब्लू बुक’ का विमोचन करेंगी, जिसमें कार्यकर्ताओं के लिए एक नया ‘सक्सेस मंत्र’ दिया गया है। मंडल स्तर पर शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से बसपा यह संदेश देना चाहती है कि वह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की दौड़ से बाहर नहीं हुई है।
15 जनवरी 1956 को दिल्ली में एक दलित परिवार में जन्मी मायावती नौ भाई-बहनों में से एक हैं। गरीबी में पली-बढ़ीं, लेकिन शिक्षा में उत्कृष्ट रहीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए, बीएड और एलएलबी की डिग्री हासिल की और 1977-1984 तक दिल्ली में शिक्षिका के रूप में कार्य किया। 1984 में बसपा में शामिल होने के बाद, वे 1989 में पहली बार सांसद बनीं। उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं और भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री होने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने दलितों और बहुजनों के लिए आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा दिया।
2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर उन्होंने इतिहास रचा। पार्कों और स्मारकों (हाथी प्रतीक सहित) के माध्यम से उन्होंने बहुजन गौरव को प्रतीकात्मक रूप दिया। उनके कार्यकाल में भव्य जन्मदिन समारोह, संपत्ति में वृद्धि और स्मारकों पर खर्च को लेकर कुछ विवाद भी रहे, लेकिन उन्होंने हमेशा इसे दान और पार्टी फंडिंग से जोड़ा।
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