Lucknow News: केजीएमयू ने मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने वाले कर्मचारी को हटाया, 25 हजार का जुर्माना
केजीएमयू प्रशासन ने क्वीनमेरी अस्पताल में मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजकर उगाही करने वाले एक आउटसोर्स कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इस मामले में आउटसोर्सिंग कंपनी पर 25 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई गोपनीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद की गई है। चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएस कुशवाहा ने इस सख्त कदम को उठाते हुए कहा कि यह राशि चीफ प्रॉक्टर फंड में जमा करनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर जुर्माना नहीं जमा किया गया, तो संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति की जाएगी। केजीएमयू प्रशासन की इस कार्रवाई से अस्पताल परिसर में दलालों और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
यह मामला तब सामने आया जब केजीएमयू के सुरक्षा अधिकारी ने सात जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर तैनात आउटसोर्स कर्मचारी दुर्गेश शुक्ला पर मरीजों और उनके तीमारदारों से अवैध वसूली का गंभीर आरोप था। आरोप था कि वह निजी कक्ष आवंटन, नो-ड्यूज और जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के नाम पर पैसे लेता था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दुर्गेश ने कुछ दलालों को सक्रिय कर रखा था, जो तीमारदारों को बहला-फुसलाकर केजीएमयू से मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाते थे। ये दलाल मरीजों को बाहरी मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदने और निजी पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए भी मजबूर करते थे। यह पूरा रैकेट उसी कर्मचारी के इशारों पर चल रहा था। इस तरह की धांधली से मरीजों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, बल्कि उन्हें सही इलाज से भी वंचित रहना पड़ सकता था।
