लखनऊ news: अमौसी-सरोजनीनगर में जलभराव से उद्योग प्रभावित, शासन स्तर पर समाधान की कवायद
लखनऊ के अमौसी और सरोजनीनगर औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। इस गंभीर स्थिति के कारण औद्योगिक इकाइयों का संचालन प्रभावित हो रहा है। समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPCIDA) ने शासन स्तर पर अंतर-विभागीय समन्वय की मांग की है। प्राधिकरण ने इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया है।
समस्या की जड़ में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा निर्मित ड्रेन है। UPCIDA के अनुसार, NHAI की ड्रेन के निर्माण से औद्योगिक क्षेत्रों की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था बाधित हुई है। इसके अलावा, लखनऊ नगर निगम के अधिकार क्षेत्र वाली आवासीय कॉलोनियों का सीवर का पानी भी औद्योगिक क्षेत्रों में जमा हो रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। इस समस्या के तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए UPCIDA ने आईआईटी बॉम्बे से भी सर्वेक्षण कराया है। अध्ययन में पाया गया है कि जल निकासी हाइड्रोलिक दृष्टि से NHAI की ड्रेन की ओर ही संभव है, लेकिन विभाग से कनेक्टिविटी की अनुमति नहीं मिल पा रही है।
इस बीच, सिंचाई विभाग ने भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का हवाला देते हुए शुभट नहर में पानी छोड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों को देखते हुए जिलाधिकारी लखनऊ ने शासन स्तर पर एक संयुक्त बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इस बैठक में NHAI, जल निगम, नगर निगम और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जल निकासी का स्थायी समाधान निकालना है। वर्तमान में UPCIDA द्वारा यूपी जल निगम के माध्यम से 3.25 एमएलडी क्षमता का एसटीपी निर्माण भी कराया जा रहा है, लेकिन बारिश के पानी के निकास के लिए आउटफॉल बिंदुओं का निर्धारण होना अनिवार्य है।
