ऑस्कर में भारत की उम्मीदें: ‘होमबाउंड’ शॉर्टलिस्ट, लेकिन नॉमिनेशन से कितना दूर?
नीरज घायवान द्वारा निर्देशित फिल्म ‘होमबाउंड’ ने ऑस्कर 2024 में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ श्रेणी में शॉर्टलिस्ट होकर भारत का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि अपने आप में बहुत बड़ी है, लेकिन ऑस्कर जीतने की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण है। शॉर्टलिस्ट होने का मतलब है कि फिल्म को दुनिया भर से आई 89 प्रविष्टियों में से शीर्ष 15 फिल्मों में जगह मिली है। हालांकि, अंतिम नॉमिनेशन के लिए केवल कुछ ही फिल्मों का चयन किया जाएगा, जहां भारत की पहली बड़ी ऑस्कर जीत की उम्मीदें टिकी हैं।
ऑस्कर शॉर्टलिस्ट और नॉमिनेशन में क्या अंतर है? शॉर्टलिस्ट अंतिम नॉमिनेशन से ठीक पहले का चरण है। इस चरण में, एकेडमी के सदस्य सभी शॉर्टलिस्टेड फिल्मों को देखते हैं और वोट करते हैं। ‘होमबाउंड’ का चयन कई वैश्विक प्रविष्टियों के बीच प्रतिस्पर्धा करने के बाद हुआ है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। फिल्म में जान्हवी कपूर, ईशान खट्टर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिका में हैं, और यह जाति तथा धर्म-आधारित भेदभाव जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाती है।
ऑस्कर के 98 साल के इतिहास में, केवल चार भारतीय फिल्में ही ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ श्रेणी में शॉर्टलिस्ट तक पहुंच पाई हैं, और इनमें से केवल तीन ही अंतिम नॉमिनेशन हासिल कर पाई हैं। महबूब खान की ‘मदर इंडिया’ (1957) पहली भारतीय फिल्म थी जिसे नॉमिनेट किया गया था, इसके बाद मीरा नायर की ‘सलाम बॉम्मान बॉम्बे!’ (1988) और आशुतोष गोवारिकर की ‘लगान’ (2002) को नॉमिनेशन मिला था। यदि ‘होमबाउंड’ अंतिम सूची में जगह बनाती है, तो यह ऐसा करने वाली चौथी भारतीय फिल्म होगी।
पान नलिन की गुजराती फिल्म ‘लास्ट फिल्म शो’ भी 2021 में शॉर्टलिस्ट हुई थी, लेकिन नॉमिनेशन तक नहीं पहुंच पाई थी। आगे की राह बेहद प्रतिस्पर्धी है, जिसमें फ्रांस की ‘इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट’ और दक्षिण कोरिया की ‘नो अदर चॉइस’ जैसी कई प्रशंसित फिल्में भी शामिल हैं। ‘होमबाउंड’ के लिए यह एक कड़ा मुकाबला है, लेकिन अगर यह नॉमिनेशन हासिल कर लेती है, तो यह भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा।
