हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और सिनेमा का अनूठा संगम, ‘मैं भूख हूँ’ पर हुई विशेष चर्चा | national literature news
नई दिल्ली के साहित्यिक पखवाड़े के दौरान हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर एक विशेष राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया, जिसने साहित्य और सिनेमा जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा [national literature news]। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी और जाने-माने गीतकार डॉ. अवनीश राही आमने-सामने आए, जिनका मुख्य केंद्र महाग्रंथ ‘मैं भूख हूँ-एक युग-काव्य-संहिता’ रहा। यह आयोजन धर्मसूत्र प्रोडक्शन के तत्वावधान में नुवॉइस प्रेस और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के सहयोग से संपन्न हुआ।
चर्चा के दौरान 14 चुनिंदा सवालों के माध्यम से ‘भूख’ के व्यापक मानवीय अर्थों को टटोला गया। सुदेश बेरी ने काव्य-यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस महाग्रंथ में भूख केवल पेट की जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर की संवेदना, संघर्ष, न्याय और सपनों का सशक्त स्वर बन जाती है। इस कृति में जन्म से लेकर राष्ट्र तक की वेदना को 14 प्रमुख स्वरों के जरिए प्रस्तुत किया गया है, जो पाठकों को गहराई से झकझोरती है।
इस साहित्यिक कृति की नवीनता यह है कि इसमें शामिल प्रत्येक गीत के साथ क्यूआर कोड जोड़ा गया है, जिससे पाठक सीधे वीडियो तक पहुंच सकते हैं। इस नवाचार को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड Records में भी स्थान मिल चुका है। डॉ. अवनीश राही ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह कृति रोटी के साथ-साथ सम्मान, प्रेम और बेहतर जीवन की आकांक्षा का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन समाज में साहित्यिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ गंभीर विषयों पर सोचने के लिए एक नया मंच प्रदान करते हैं।
