लखनऊ में रसूखदारों की अवैध बसें, जांच अभियान पर ‘ब्रेक’ | Lucknow Bus News
लखनऊ शहर में अवैध रूप से संचालित हो रही लग्जरी बसों का जाल फैला हुआ है, जो दिल्ली, हरिद्वार, पश्चिम यूपी और पूर्वांचल जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए यात्रियों को ले जाती हैं। इन बसों में डबल डेकर और अन्य प्रीमियम वाहन शामिल हैं, जिनकी तकनीकी जांच शायद ही कभी की जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन बसों के संचालन के पीछे प्रभावशाली लोगों का हाथ है, जिसके कारण परिवहन विभाग के जांच अभियान अक्सर बीच में ही रुक जाते हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।
वर्तमान में, लखनऊ से लगभग 22 डबल डेकर और 140 अन्य लग्जरी बसें बिना किसी वैधानिक स्टैंड के चल रही हैं। अवध चौराहा के पास सबसे अधिक बसों का जमावड़ा देखा जाता है, जहाँ शाम होते ही अवैध अड्डे पर बसें खड़ी हो जाती हैं। इन बसों की सीटों की बुकिंग ऑनलाइन होती है, लेकिन किराए का भुगतान अक्सर बस में सवार होने के बाद किया जाता है, जिससे राजस्व चोरी की आशंका बनी रहती है।
परिवहन आयुक्त द्वारा डग्गामार बसों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश बार-बार दिए जाते हैं, लेकिन हर बार रसूखदारों की सक्रियता के कारण अधिकारी पीछे हट जाते हैं। शहर में एक दर्जन से अधिक ऐसे अवैध अड्डे हैं, जिनमें अवध चौराहा से पारा फ्लाईओवर, शहीद पथ पर पलासियो मॉल के पास, चिनहट, कमता, पॉलीटेक्निक कॉलेज गेट, अहिमामऊ, कैसरबाग, मड़ियांव, तेलीबाग, पीजीआई और सीतापुर रोड शामिल हैं।
इन अवैध बसों तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए कैसरबाग, अवध और आलमबाग बस अड्डों के पास ऑटो वाले सक्रिय रहते हैं। वे यात्रियों को कम किराए और लग्जरी बस का लालच देकर इन अवैध स्टैंड तक पहुंचाते हैं, जिसके एवज में उन्हें बस संचालकों से कमीशन मिलता है। लखनऊ जोन के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने बताया कि डग्गामार बसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है और जल्द ही एक और सख्त अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
