केजीएमयू की 60 बिल्डिंग पर ₹50.85 करोड़ का हाउस टैक्स, नगर निगम ने भेजा नोटिस | Lucknow news
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और नगर निगम के बीच हाउस टैक्स को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक संयुक्त सर्वे के बाद नगर निगम ने केजीएमयू की 60 इमारतों पर कुल ₹50.85 करोड़ का हाउस टैक्स बकाया निर्धारित किया है। इसमें पिछले वर्षों का बकाया और वर्तमान कर निर्धारण दोनों शामिल हैं। नगर निगम ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर इस राशि का भुगतान करने का नोटिस जारी किया है, चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटनाक्रम शहर के बड़े संस्थानों पर कर वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पहले, केजीएमयू की केवल 17 इमारतों का ही कर निर्धारण किया गया था, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपत्ति जताई थी। केजीएमयू का तर्क था कि कर निर्धारण अत्यधिक है और सभी भवनों का सही विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस आपत्ति के बाद, नगर निगम के टैक्स विभाग के अधिकारियों और केजीएमयू के इंजीनियरों की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। इस टीम ने परिसर की दोबारा नापजोख की, जिससे पूरी तस्वीर बदल गई।
संयुक्त सर्वे में विश्वविद्यालय परिसर में कुल 60 इमारतें पाई गईं, जिनमें शैक्षणिक भवन, आवासीय परिसर और प्रशासनिक ढांचे शामिल हैं। नगर निगम ने इन सभी 60 भवनों के लिए अलग-अलग हाउस आईडी जारी की हैं और प्रत्येक का पृथक हाउस टैक्स निर्धारित किया है। इस विस्तृत गणना के बाद ही कुल ₹50.85 करोड़ का बकाया हाउस टैक्स आंका गया है। नापजोख में यह भी सामने आया कि अकेले केजीएमयू के कुलपति आवास पर ही ₹14.41 लाख का हाउस टैक्स बकाया है। नगर निगम का कहना है कि अब सभी भवनों का रिकॉर्ड अद्यतन कर दिया गया है, जिससे कर निर्धारण पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के अनुरूप है।
