लखनऊ यूनिवर्सिटी में मोहन भागवत के विरोध पर बवाल, कई छात्र हिरासत में; Lucknow news
लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर बुधवार को उस समय गरमा गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के एक कार्यक्रम के विरोध में विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक विचारधाराओं के बढ़ते टकराव और छात्र आंदोलनों की एक बानगी पेश करती है। छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।
मोहन भागवत के विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित ‘शोधार्थी संवाद’ कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ही एनएसयूआई (NSUI), समाजवादी छात्र सभा और भीम आर्मी के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। उन्होंने परिसर के कैशियर ऑफिस के पास भारी संख्या में जमा होकर ‘गो बैक’ के नारों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन और संघ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। छात्रों की पुलिस के साथ जबरदस्त झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई प्रदर्शनकारियों को मौके से उठाकर हिरासत में ले लिया और उन्हें गाड़ियों में भरकर थाने ले गई। इस दौरान परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई कार्यकर्ता शुभम खरवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से संघ की गोद में बैठ गया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यूजीसी (UGC) के विवादित फैसलों और उस पर आए सुप्रीम कोर्ट के स्टे के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट करें। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के मुद्दे पर दखल दिया है, तो देश के इतने बड़े संगठन के प्रमुख इस पर मौन क्यों हैं? उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में संघ की विचारधारा को जबरन थोपा जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने भी एलयू प्रशासन पर पक्षपात का बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के सभागार केवल आरएसएस और एबीवीपी (ABVP) के कार्यक्रमों के लिए ही उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब भी विपक्षी छात्र संगठन किसी शैक्षणिक या सामाजिक चर्चा के लिए हॉल की मांग करते हैं, तो उन्हें नियमों का हवाला देकर टाल दिया जाता है, लेकिन भाजपा सरकार के दबाव में यूनिवर्सिटी प्रशासन संघ के आयोजनों के लिए रेड कार्पेट बिछा देता है। छात्रों ने इसे लोकतंत्र और शिक्षा के मंदिर का अपमान बताते हुए भविष्य में और भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। फिलहाल, परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में रखा गया है। यह घटना Lucknow news में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
