एआई के साथ हीलिंग टच भी जरूरी: राजनाथ सिंह, मरीज के मन की पीड़ा मशीन नहीं समझ सकती
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी मशीन मरीज के मन की पीड़ा और भावनाओं को नहीं समझ सकती। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का स्नेह और अपनापन हीलिंग टच प्रदान करता है, जो किसी भी तकनीक से परे है।
डॉक्टरों के व्यवहार, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को उन्होंने ज्ञान से भी अधिक महत्वपूर्ण बताया। मरीज डॉक्टर के ज्ञान पर भरोसा करता है, लेकिन उसके स्नेह और आत्मीयता को हमेशा याद रखता है। उन्होंने ‘व्हाइट कोट सिंड्रोम’ जैसी अवधारणाओं पर चिंता व्यक्त की और कहा कि डॉक्टरों को मरीजों में विश्वास जगाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने डॉक्टरों से सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया, विशेषकर गरीब और कमजोर वर्ग के मरीजों के प्रति। उन्होंने कहा कि सभी मरीजों का समान भाव से इलाज करना ही डॉक्टर का परम धर्म है। मरीज की बातों को धैर्यपूर्वक सुनना निदान में सहायक होता है।
उन्होंने डॉक्टरों के स्वयं के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने, योग-ध्यान को दिनचर्या में शामिल करने और बीमारी की रोकथाम पर भी जोर देने की सलाह दी। महिलाओं के स्वास्थ्य पर शोध, अंगदान के प्रति जागरूकता और ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों को प्रेरित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और जन औषधि केंद्रों की सराहना की और कहा कि भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, जिसमें नैनो ड्रग और जीन थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम हो रहा है।
