GST Impact: यूपी सरकार को राजस्व में 1150 करोड़ का नुकसान, केंद्र से की व्यवस्था बदलने की मांग
उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से जीएसटी (Goods and Services Tax) व्यवस्था में बदलाव करने की मांग की है। राज्य सरकार का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से पान मसाला, तंबाकू उत्पादों और ईंट भट्ठा उद्योग से मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आई है। इस वजह से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 1150 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले पान मसाला और तंबाकू उत्पादों से सालाना 1000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था, जो अब घटकर मात्र 300 करोड़ रुपये रह गया है। इसी तरह, ईंट भट्ठों से होने वाली वार्षिक आय भी 700 करोड़ रुपये से घटकर 250 करोड़ रुपये पर आ गई है।
उत्पादन क्षमता आधारित कर की मांग
राज्य सरकार का मानना है कि राजस्व में यह कमी उद्योगों द्वारा खपत आधारित उत्पादन घोषित किए जाने के कारण हुई है। प्रदेश सरकार चाहती है कि जीएसटी से पहले लागू की गई व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए। इस व्यवस्था में उद्योगों की कुल उत्पादन क्षमता के आधार पर कर का आकलन किया जाता था।
वित्त मंत्री खन्ना ने तर्क दिया कि उत्पादन क्षमता आधारित कर निर्धारण से निर्माताओं पर उत्पीड़न की गुंजाइश नहीं रहती और सरकार का राजस्व भी नहीं घटता। हालांकि, कुछ उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन आधारित टैक्स व्यवस्था से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
जीएसटी भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू एक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है, जिसने कई पुराने करों को बदलकर ‘एक देश, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया था।
