UP में AI की वास्तविकता पर मंथन: IIT प्रोफेसर बोले- सफलता नहीं, प्रभाव पर करें चर्चा (AI impact)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में चल रही बहस, उत्साह और भारी निवेश के बीच यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या यह सचमुच अगली औद्योगिक क्रांति है या सिर्फ एक अस्थायी बुलबुला। इसी गंभीर और सामयिक विषय पर मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की सूचना एवं प्रौद्योगिकी समिति ने एक सत्र का आयोजन किया। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विमल कुमार ने आर्थिक दृष्टिकोण से AI की वास्तविकता को सरल और तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रोफेसर कुमार ने कहा कि AI को एक सार्वभौमिक उपयोग की तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे कभी बिजली और कंप्यूटर को देखा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI को लेकर जो अत्यधिक उम्मीदें और चर्चा हैं, वही इसके “बुलबुले” की आशंका को जन्म देती हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि प्रारंभिक उत्साह और अस्थायी निराशा किसी भी बड़ी तकनीकी क्रांति की स्वाभाविक प्रक्रिया होती है।
उन्होंने कहा कि असली प्रश्न यह नहीं है कि AI सफल होगा या नहीं, बल्कि यह है कि यह कब, कहां और किन क्षेत्रों में प्रभावी साबित होगा। AI का व्यापक उपयोग इसलिए धीमा है क्योंकि इसके लिए केवल नए उपकरण अपनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि पूरे कार्यप्रवाह और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की जरूरत होती है। उन्होंने जोर दिया कि AI के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए हमें इसके दीर्घकालिक एकीकरण पर ध्यान देना होगा।
