2000 करोड़ की सरकारी जमीन घोटाला: 10 यूपी अफसरों पर कार्रवाई तय, जानिए पूरा मामला
लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में चारागाह और बंजर सहित सुरक्षित सरकारी जमीनों को हड़पने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसकी कीमत 2000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस मामले में 10 पूर्व चकबंदी अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, जो प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।
सरकारी जमीन घोटाला
यह घोटाला भूमाफिया और चकबंदी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से छह गांवों में 120 बीघा सरकारी जमीन पर किया गया था। पुलिस और विभागीय जांच में 1988 से अबतक तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उनकी संलिप्तता के बिना इतने बड़े घोटाले को अंजाम देना संभव नहीं था। जानकीपुरम पुलिस ने इस अवधि में तैनात रहे चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है।
जांच और एफआईआर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 1988 में देवा रोड, बीकेटी, इंदिरानगर और जानकीपुरम के छह गांवों में सरकारी जमीनों पर भूमाफिया ने फर्जी आदेश बनवाए थे। इसके बाद जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेच दिया गया। चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों ने भूमाफिया के दावों को सही मानते हुए उसके पक्ष में आदेश जारी किए। यह खेल सालों तक चलता रहा। बाद में भूमाफिया ने अपने गुर्गों के जरिए इन जमीनों को खतौनी में दर्ज कराने के लिए 2020 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय का हस्तक्षेप और कार्रवाई
सुनवाई के दौरान, न्यायालय को दस्तावेजों के सत्यापन में संदेह हुआ और जिलाधिकारी लखनऊ से आदेश सत्यापित करने का हलफनामा मांगा गया। 2021 में पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में चली गई। न्यायालय के बार-बार पूछने पर रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को सौंपी गई, जिसमें भूमाफिया के साथियों का खेल उजागर हुआ। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जानकीपुरम थाने में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और घोटाले के दौरान तैनात रहे अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
