गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने रविवार को कहा कि 'बिर्च बाय रोमियो लेन' नाइट क्लब में लगी भीषण आग आंतरिक आतिशबाजी के कारण लगी थी। उन्होंने आगे कहा कि क्लब में सीमित निकास द्वारों...
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने रविवार को कहा कि ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में लगी भीषण आग आंतरिक आतिशबाजी के कारण लगी थी। उन्होंने आगे कहा कि क्लब में सीमित निकास द्वारों के कारण हताहतों की संख्या बढ़ी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सिलेंडर विस्फोट के दावे को खारिज कर दिया, जिसे पहले आग लगने और मौतों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा था।
विपक्षी दलों के गुस्से का सामना कर रहे सावंत ने दावा किया कि एक तथ्यान्वेषी पैनल का गठन किया गया है, जो मामले की जांच करेगा और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि पीड़ितों के परिवारों को घटना के लिए 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को 50,000 रुपये एसडीआरएफ फंड के माध्यम से स्वीकृत किए जाएंगे। सरकार मृतकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए पूरी सहायता प्रदान करेगी। इसके लिए एसडीएम, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों सहित एक समर्पित टीम का गठन किया गया है। मैंने मुख्य सचिव और डीजीपी को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।’
सावंत ने पहले घटना की मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया था, जिसमें अधिकारियों को उन परिस्थितियों की जांच करने का निर्देश दिया गया था जिनके कारण स्थल को संचालित करने की अनुमति मिली और सुरक्षा अनुपालन में किसी भी चूक की पहचान की गई। उन्होंने बताया, ‘गोवा नाइट क्लब के मुख्य महाप्रबंधक और तीन अन्य कर्मचारियों को मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।’
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गोवा पुलिस फिलहाल मालिकों, सौरभ और गौरव लूथरा की तलाश कर रही है। मालिक वर्तमान में दिल्ली में हैं, और उन्हें ट्रेस करने और गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम दिल्ली के लिए रवाना हो गई है। इस बीच, पुलिस ने पहले ही अरपोरा-नागोवा पंचायत सरपंच रोशन रेडकर को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने 2013 में परिसर के लिए व्यापार लाइसेंस जारी किया था।
शनिवार रात उत्तरी गोवा के ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में भीषण आग लग गई, जिसमें 25 लोगों की जान चली गई। इन 25 लोगों में से 14 लोगों के शवों की पहचान कर ली गई है। चार नई दिल्ली के पर्यटक थे, जबकि बाकी 10 काम करने वाले कर्मचारी थे, जो झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।