गोमतीनगर से 25 हजार का इनामी जालसाज गिरफ्तार, Rajasthan Police ने दबोचा
लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब बच्चों के साथ मंदिर जा रहे एक व्यक्ति को काले रंग की स्कार्पियो में सवार कुछ लोगों ने जबरन उठा लिया। यह घटना ग्वारी चौराहे के पास हुई, जिसके बाद बच्चों की चीख-पुकार सुनकर लोगों ने इसे अपहरण समझकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि, बाद में पता चला कि यह कोई अपहरण नहीं बल्कि Rajasthan Police की क्राइम ब्रांच द्वारा की गई गिरफ्तारी थी। गिरफ्तार किया गया व्यक्ति स्मारक सुरक्षा वाहिनी का गार्ड अखिलेश त्रिपाठी था, जो राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के मामलों में 25 हजार रुपये का इनामी अपराधी था। यह घटना दिखाती है कि कानून की पहुंच कितनी लंबी होती है, अपराधी चाहे कितने भी साल फरार रहे, उसे एक दिन पकड़ लिया जाता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अखिलेश त्रिपाठी गोमतीनगर के विश्वासखंड पांच में रहता था और स्मारक सुरक्षा वाहिनी में गार्ड के तौर पर कार्यरत था। करीब 30 साल पहले वह राजस्थान के सवाई माधोपुर के गंगापुर में रहता था, जहां वह एक निजी फाइनेंस कंपनी में काम करता था। उसके खिलाफ वर्ष 1998 और 2000 में धोखाधड़ी, साजिश और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मुकदमों के बाद वह राजस्थान से फरार हो गया था और पिछले 28 सालों से लखनऊ में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। उसने अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छुपाकर स्मारक समिति में नौकरी भी हासिल कर ली थी।
राजस्थान पुलिस ने अखिलेश की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था और उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट भी जारी हुआ था। हाल ही में राजस्थान पुलिस को अखिलेश के लखनऊ में होने की सूचना मिली, जिसके बाद वहां की क्राइम ब्रांच की टीम लखनऊ पहुंची। रविवार को जब अखिलेश अपने बच्चों के साथ मंदिर जा रहा था, तभी काले रंग की स्कार्पियो में सवार पुलिसकर्मियों ने उसे रोका और गाड़ी में खींचकर ले गए। बच्चों के शोर मचाने पर मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए और उन्होंने इस घटना को अपहरण समझकर पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की, तो उन्हें राजस्थान पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी का पता चला। कुछ देर बाद राजस्थान पुलिस की टीम गोमतीनगर थाने पहुंची और स्थानीय पुलिस को पूरी जानकारी दी।
