UP के किसान Achal Mishra की FPO Success Story, राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के खीरी जिले के किसान अचल मिश्रा ने अपनी मेहनत और नवाचार से खेती को एक नई दिशा दी है। उन्होंने यह साबित किया है कि सही रणनीति और उद्यमिता के साथ खेती घाटे का सौदा नहीं है। परंपरागत खेती से हटकर, अचल मिश्रा ने एक किसान कंपनी (FPO) की स्थापना की, जिसके बाद उन्हें पहले ‘करोड़पति किसान’ का सम्मान मिला और अब भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने उन्हें ‘प्रेरणादायक किसान’ की श्रेणी में शामिल किया है।
लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक में भारत-नेपाल सीमा से सटे मेड़ाईपुरवा गांव के अचल मिश्रा ने आधुनिक और सह-फसली खेती को अपनाया। उन्होंने एक FPO बनाकर लगभग 400 किसानों को साथ जोड़ा। इस संगठन के माध्यम से किसान अब सह-फसली खेती के साथ बीज उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे सभी को सीधा लाभ हो रहा है। अचल मिश्रा का नाम हाल ही में देश के प्रेरणादायक और नवोन्मेषी किसानों में शामिल किया गया है।
खेती में नए प्रयोगों के दम पर अचल मिश्रा को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें गन्ना उत्पादन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद ने भी उन्हें सम्मानित किया है। वर्ष 2020-21 में उन्हें उत्कृष्ट एकीकृत कृषि पुरस्कार प्रदान किया गया। 2023-24 में अचल मिश्रा को ‘भारत के करोड़पति किसान’ के रूप में मान्यता मिली। हाल ही में दिल्ली में उन्हें भारत के नवोन्मेषी किसान के रूप में सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा प्रकाशित नवोन्मेषी किसानों पर आधारित पुस्तक में उनका लेख भी शामिल किया गया है।
तराई क्षेत्र का खीरी जिला हर साल बाढ़ और कटान की समस्या से जूझता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में अचल मिश्रा ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से FPO की शुरुआत की। इस संगठन से करीब 400 किसान जुड़ चुके हैं, जिनमें लगभग 150 थारू आदिवासी महिलाएं शामिल हैं। सह-फसली खेती और बीज उत्पादन के जरिए अब खेती आय का मजबूत जरिया बन रही है।
अचल मिश्रा का लक्ष्य ट्रेंच रिंग पिट आधारित गन्ना खेती को अधिक विस्तार देना है। इसके साथ फूलों की खेती से जुड़ी अंतर फसली प्रणाली, FPO आधारित सामूहिक विपणन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देना भी उनकी प्राथमिकता है। इससे किसानों की अतिरिक्त आमदनी सुनिश्चित होगी और खेती तरक्की और आत्मनिर्भरता का रास्ता बनेगी।
