सतत विकास के लिए EIA जरूरी, लखनऊ विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने बताया महत्व
लखनऊ में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विकास परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों की वैज्ञानिक समझ प्रदान करना था।
मुख्य वक्ता डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया, उसके महत्व और विभिन्न विकास परियोजनाओं में इसके व्यावहारिक उपयोगों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी विकास परियोजना को लागू करने से पूर्व उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि यह मूल्यांकन सतत विकास के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस विषय से जुड़े तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया, ताकि वे भविष्य में इस क्षेत्र में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
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