फ्रांस के छात्र आंदोलन को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया ‘इस्लामी टेकओवर’, जानिए क्या है पूरा विवाद | international news
फ्रांस में इन दिनों स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन की शुरुआत पेरिस के पास स्थित एक हाई स्कूल से हुई थी, जहां छात्रों ने कक्षाओं में बच्चों की बढ़ती संख्या के मुकाबले शिक्षकों, नर्सों और दिव्यांग बच्चों की मदद करने वाले स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा उठाया था। देखते ही देखते यह स्थानीय विरोध देश के कई अन्य हिस्सों में भी फैल गया और अब विभिन्न छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियन भी इसमें शामिल हो चुकी हैं।
बजट दबाव और हिंसक झड़पें
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब फ्रांसीसी सरकार पर बजट को लेकर भारी दबाव बना हुआ है। प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू द्वारा 2027 के बजट में भारी बचत की योजनाओं और सरकारी कर्मचारियों के वेतन को फ्रीज करने जैसी बातों ने नागरिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि सरकार का मानना है कि इन नीतियों को लेकर समाज में कई तरह की अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हिंसक झड़पें भी देखने को मिली हैं, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ दमकल के वाहनों को भी निशाना बनाया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
ट्रंप के बयान के मायने और राजनीतिक नफा-नुकसान
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की इस अशांति को प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि फ्रांस में जो कुछ भी हो रहा है, वह स्कूलों की समस्या नहीं बल्कि अनियंत्रित आप्रवासन और इस्लाम के बढ़ते प्रभाव का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी और यूरोपीय दक्षिणपंथी राजनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वे अपनी घरेलू सीमाओं और आप्रवासन नीतियों को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि यह छात्र आंदोलन किसी संगठित धार्मिक एजेंडे के तहत चलाया जा रहा है।
