दिल्ली में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट पर हाईकोर्ट ने मांगा कानूनी जवाब | delhi high court structural audit
दिल्ली में सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों की सुरक्षा और मजबूती को लेकर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राजधानी में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट को लेकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर स्पष्टता मांगते हुए संबंधित बिल्डिंग और प्लानिंग कानूनों पर सहायता मांगी है। यह न्यायिक प्रक्रिया सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पुरानी इमारत ढहने के बाद दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आगे बढ़ रही है।
बता दें कि पिछले साल सितंबर महीने में सत्य निकेतन में करीब पचास साल पुरानी पांच मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसका इस्तेमाल लड़कों के पीजी के रूप में किया जा रहा था। इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही शहर की पुरानी और व्यावसायिक रूप से उपयोग हो रही इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
दाखिल की गई जनहित याचिका में मांग की गई है कि दिल्लीभर की सार्वजनिक इस्तेमाल वाली इमारतों की संरचनात्मक मजबूती और फायर सेफ्टी की जांच के लिए एक व्यापक और समयबद्ध नीति बनाई जाए। याचिका में इस हादसे की स्वतंत्र जांच कराने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की भी मांग है कि निर्माण से जुड़ी मंजूरियों और नियमों की अनदेखी करने वालों की जिम्मेदारी तय हो। इस तरह के सख्त कानूनी कदमों से भविष्य में होने वाली त्रासदियों को रोका जा सकेगा और आम जनता की सुरक्षा पुख्ता होगी।
मामلا अब अदालत के विचाराधीन है और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है। तब तक यह स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौजूदा कानूनों के तहत इमारतों की सुरक्षा जांच को किस प्रकार अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है।
