नोएडा में श्रमिक आंदोलन की आड़ में अराजकता की साजिश, 45 गैर-श्रमिक गिरफ्तार; Noida news
उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान अराजकता फैलाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि यह घटना केवल श्रमिकों के असंतोष का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र था। इस साजिश में कुछ संदिग्ध राजनीतिक विचारधारा वाले दलों की भूमिका सामने आई है।
जांच में पता चला है कि कुल 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग ऐसे थे जो वास्तविक श्रमिक नहीं थे। आगजनी की घटना में चिन्हित 17 लोगों में से 11 को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 8 गैर-श्रमिक थे। भड़काने के आरोप में 32 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से 19 को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, 34 ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया है जो श्रमिक न होते हुए भी आंदोलन में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे।
यह भी सामने आया है कि इस साजिश में शामिल कुछ लोगों का संबंध संगठित नेटवर्क से था। जांच एजेंसियों के अनुसार, नोएडा के आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने और उत्तर प्रदेश की प्रगति को बाधित करने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया था। आरोप है कि कुछ राजनीतिक दल इस पूरे इकोसिस्टम का हिस्सा थे, जिनका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारना था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस हिंसक प्रदर्शन में बंगाल, बिहार और यूपी समेत देश के अलग-अलग कोनों से आईं कुछ महिलाएं भी सक्रिय रूप से शामिल थीं, जिनकी भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। इन तत्वों का मकसद अराजकता भड़का कर नोएडा को आग के हवाले कर देना था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया। श्रमिकों के हितों में वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद मजदूरों और फैक्ट्री मालिकों ने सहयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से सामान्य हो गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
