देहरादून में बेटे की मौत पर BSF जवान पिता का दर्द: ‘ऐसी मौत किसी को न मिले’, आरोपियों को फांसी की मांग
देहरादून में नस्लीय हमले (racist attack) में अपने बेटे को खोने वाले एक बीएसएफ जवान ने न्याय की गुहार लगाई है। त्रिपुरा के रहने वाले छात्र एंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को इस तरह से अपने बच्चे को नहीं खोना चाहिए। उन्होंने आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग की है।
तरुण चकमा ने कहा, “मेरा बच्चा चला गया है। यह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। हम तबाह हो चुके हैं। हमारी बस यही गुजारिश है कि किसी और बच्चे की मौत इस तरह न हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि हमले में स्थानीय लोग शामिल थे और ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी।
नस्लीय टिप्पणी पर हुआ था विवाद
24 वर्षीय एंजेल चकमा त्रिपुरा के उनाकोणाकोटी जिले के रहने वाले थे और देहरादून में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे। 9 दिसंबर को उन्होंने अपने छोटे भाई माइकल चकमा पर की गई नस्लीय टिप्पणियों का विरोध किया था। आरोप है कि हमलावरों ने दोनों भाइयों को ‘चीनी’ कहकर संबोधित किया था। विवाद बढ़ने पर एंजेल पर हमला किया गया, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में ग्राफिक एरा अस्पताल ले जाया गया। 17 दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद एंजेल ने दम तोड़ दिया।
आरोपियों के लिए फांसी की मांग
अपने बेटे की मौत से दुखी तरुण चकमा ने कहा कि अगर उनका बेटा बच जाता तो वह शायद आरोपियों को माफ कर देते, लेकिन अब उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने देश में नस्लीय दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि भारत जैसे विविध देश में ऐसी चीजें स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, “भारत के हर कोने से बच्चे देश भर में रहते हैं। ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। नस्लीय टिप्पणी का यह मुद्दा पूरी तरह से गलत है।”
पुलिस कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 23 दिसंबर को उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में पुलिस की लापरवाही का आरोप लगाया था। आयोग के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने एफआईआर में हत्या की धाराएं जोड़ीं। पुलिस ने इस मामले में सूरज खवास (22), अविनाश नेगी (25) और सुमित (25) सहित दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है। एक अन्य आरोपी के नेपाल भाग जाने की आशंका है, जिसकी गिरफ्तारी पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि नस्लवाद को सामान्य नहीं किया जाना चाहिए और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए। देहरादून, त्रिपुरा और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। एंजेल के पिता ने कहा कि उनकी लड़ाई अब सिर्फ अपने बेटे के लिए नहीं, बल्कि घर छोड़कर पढ़ने आए हर छात्र के लिए है।
