BRA Bihar University में क्वालीफाइंग मार्क्स घटे, एलएलबी और प्री-लॉ सीटों को भरने की कवायद
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में एलएलबी और प्री-लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स को घटाने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय लगातार दूसरे वर्ष इन पाठ्यक्रमों की खाली सीटों को भरने के उद्देश्य से प्रवेश परीक्षा के लिए उत्तीर्ण अंक को घटाकर 25 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। रेगुलेशन के अनुसार, लॉ प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, ऐसे में इस कटौती को एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पिछले वर्ष भी क्वालीफाइंग मार्क्स को तीन बार घटाया गया था, लेकिन इसके बावजूद लॉ कॉलेजों की सभी सीटें नहीं भर पाई थीं। इस वर्ष भी स्थिति ऐसी ही रहने की आशंका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले महीने हुई लॉ प्रवेश परीक्षा में एलएलबी के लिए केवल 1032 और प्री-लॉ के लिए 391 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा दी थी। वहीं, विश्वविद्यालय से संबद्ध डेढ़ दर्जन से अधिक लॉ कॉलेजों में तीन हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। सीटों की तुलना में परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या काफी कम है, जिससे यह तय है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाएंगी।
विश्वविद्यालय के प्राक्टर प्रो. बीएस राय ने बताया कि क्वालीफाइंग मार्क्स घटाकर परिणाम जारी करने की तैयारी है और एक से दो दिनों में परिणाम जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि सीटें भरने के लिए कुछ लॉ कॉलेजों द्वारा मैनेजमेंट कोटे के तहत नामांकन लेने की शिकायतें भी विश्वविद्यालय तक पहुंची हैं। यह तब हो रहा है जब विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कराई थी। इसके समानांतर, कॉलेजों ने भी सीटों को भरने के लिए स्वयं आवेदन कराकर नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ली है, और कुछ कॉलेजों में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे कॉलेजों से स्पष्टीकरण मांगने और आवश्यक कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, कॉलेजों का कहना है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण लगातार दूसरे वर्ष लॉ कोर्स में सीटें नहीं भर पा रही हैं। प्रवेश परीक्षा अक्टूबर महीने में कराई गई, जो देरी का एक कारण है। इस देरी के चलते कुल सीटों के मुकाबले काफी कम आवेदन आए, जिससे कॉलेजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति विश्वविद्यालय के परीक्षा कैलेंडर के पिछड़ने का भी संकेत देती है, जिसके कारण परीक्षाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
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