बिहार शराब कांड: कोर्ट के आदेश के बावजूद 12 लाख की स्कार्पियो 3.85 लाख में नीलाम, अफसरों पर FIR
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शराब और गाड़ियों की नीलामी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कोर्ट के आदेश के बावजूद गड़बड़ी की गई। शराब के साथ जब्त की गई एक स्कार्पियो को कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुक्त न करने और बाद में उसे बेहद कम कीमत पर नीलाम करने का खुलासा हुआ है। इस मामले में पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, डीएसपी पूर्वी, सकरा के तत्कालीन थानाध्यक्ष और एक दारोगा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है।
यह मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है, जब मुशहरी निवासी सुशील कुमार सिंह की स्कार्पियो गाड़ी को सकरा थाना क्षेत्र से शराब के साथ जब्त किया गया था। वाहन से पांच बोतल विदेशी शराब बरामद होने का दावा किया गया था। पीड़ित ने विशेष उत्पाद न्यायालय में वाहन मुक्त कराने के लिए याचिका दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष को वाहन छोड़ने का आदेश दिया।
हालांकि, आदेश के बावजूद वाहन नहीं छोड़ा गया। काफी समय बाद, मार्च 2023 में न्यायालय को सूचित किया गया कि वाहन को राज्यसात कर नीलाम कर दिया गया है। पीड़ित की अपील और पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज होने के बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने पाया कि एक्साइज कोर्ट-1 के 11 जनवरी 2023 के वाहन मुक्त करने के आदेश का पालन नहीं किया गया और 31 मार्च 2023 को स्कार्पियो की नीलामी कर दी गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2018 में खरीदी गई यह स्कार्पियो, जिसकी कीमत करीब 12.12 लाख रुपये आंकी गई थी, उसे महज 3.85 लाख रुपये में बेच दिया गया। यह वाहन दिसंबर 2020 से मार्च 2023 तक तत्कालीन डीएसपी पूर्वी द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा, जिसे अदालत ने गंभीर अनियमितता माना।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि इसी तरह 490 वाहनों की नीलामी में अनियमितताएं हुई हैं, जिसमें एक व्यक्ति द्वारा आठ वाहन खरीदना भी शामिल है। अदालत ने इस रैकेट की आशंका जताते हुए ईओयू को विस्तृत जांच का निर्देश दिया है। इस जांच से शराब जब्ती के दौरान गाड़ियों की नीलामी के नाम पर नियमों की अनदेखी करने वाले असली गुनहगारों का चेहरा सामने आने की उम्मीद है।
